गांधी वध क्यों?

लगभग 300 पृष्ठों की यह पुस्तक “गाँधी हत्या” से जुड़े लगभग सभी दस्तावेजों एवं प्रमाणों को सचित्र रूप से पेश करती है. पुस्तक में मुख्य रूप से नथूराम का वह वक्तव्य है जो उन्होंने ने बकायदा कोर्ट के अनुमति से खुली अदालत में दिया था. जिसके बारे में उस मामले के तत्कालीन जज‘JUSTICE KHOSLA’ ने अपनी किताब “The murder of the Mahatma” में लिखा है:-
      “I have however no doubt that had the audience of that day been constituted into a jury and entrusted with the task of deciding Godse’s appeal, they would have brought in a verdict of ‘not guilty’ by overwhelming majority.”
-(The Murder of Mahatma, Page 234)
नथूराम गोडसे ने कहा था कि-
      “यदि देशभक्ति पाप है तो मैं मानता हूँ, मैंने पाप किया है. यदि प्रशंसनीय है तो मैं अपने आपको उस प्रशंसा का अधिकारी समझता हूँ. मुझे विश्वास है कि मनुष्य द्वारा स्थापित न्यायालय के ऊपर कोई न्यायालय हो तो उसमें मेरे काम को अपराध नहीं समझा जाएगा. मैंने देश और जाति की भलाई के लिए यह काम किया. मैंने उस व्यक्ति पर गोली चलाई जिसकी नीति से ही हिन्दुओं पर घोर संकट आए, हिन्दू नष्ट हुए.”
दिनांक 30 जनवरी 1948 की शाम को नथुराम गोडसे ने महात्मा गाँधी को गोली मारकर उनका वध कर दिया था. फिर नथुराम गोडसे ने आत्म-समर्पण कर दिया. उसके बाद न्यायालय में उनके ऊपर अभियोग चलाया गया. तब नथुराम गोडसे ने न्यायालय में अपना निवेदन प्रस्तुत किया था (बयान दिया था).
प्रस्तुत पुस्तक में- नथुराम गोडसे का वही संपूर्ण निवेदन (बयान) दिया गया है. इसको पढ़ कर नथूराम गोडसे के विचारों को और तत्कालीन राजनैतिक, सामाजिक परिस्थितियों को भली प्रकार से समझा जा सकता है.
इसके अतिरिक्त इस पुस्तक में अन्य अनेक महत्वपूर्ण तथ्यों को भी दिया गया है जैसे भारत का संक्षिप्त इतिहास, भारतीय न्याय प्रणाली का परिचय, महात्मा गाँधी वध कांड में की गई न्यायिक कार्यवाही, नथुराम गोडसे द्वारा लिखे गए पत्र आदि. साथ ही अनेक दुर्लभ छाया चित्र भी दिए गए है.
यह पुस्तक- पुर्णतः शुद्ध एवं पुर्णतः प्रमाणिक तथ्यों पर ही आधारित है.

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